मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

भोज पत्र यंत्रों के जब प्रयोग सामने आते हैं तो एक सामान्य साधक का यह सोचना स्वाभाविक हैं की इन्हें बनाया कैसे जाये . दूसरा यह भोज पत्र क्या हैं , क्या इसमें भी कुछ गुणवत्ता देखना जरुरी हैं . भोज पत्र पर यंत्र बनाना कहीं ज्यादा उचित माना गया हैं .यु तो काल अवधि को दृष्टिगत रखते हुए चांदी ताम्बे और स्वर्ण पर भी निर्माण देखने में आया गया हैं कतिपय विशष्ट यंत्रो के साथ यदि धातुओं से जुडी हुयी कुछ विशष्ट ता हैं तो यह अलग बात हैं क्योंकि हर धातु का अपना एक अलग ही गुण हैं जो मानव को प्रभावित भी करता हैं हैं कुछ धातुये अलग तत्व को तो कुछ अलग तत्वों की प्रतिनिधि होती हैं , यहाँ तत्व से तात्पर्य सत रज तम से हैं . और किसके लिए किस प्रकार की व्यवस्था हैं यह तो कोई योग्य ही सामने रख सकता हैं, क्योंकि अगर यह विज्ञानं हैं तो सारे कार्य कलाप में एक निश्चित परिणाम की प्राप्ति के लिए एक निश्चित तरीका भी तो उपयोग होगा. भोज पत्र एक वृक्ष का नाम हैं और इसकी छाल ही भोज पत्र के नाम से बिकती हैं यह एक और भूरे रंग की तो दूसरी और सफ़ेद रंग की होती हैं भूरे रंग को ही लाल कह कर बाजार में उपलब्ध कराया जाता हैं ., ध्यान रहे भोज पत्र की यह छाल जिस पर यह यन्त्र बनाया जाना हैं वह साफ़ सुथरा और टुटा फूटा न हो .और इसको बाजार से ले आये साथ ही यह तो एक कागज़ की तरह का होता हैं तो जितना बड़ा यन्त्र हो उस आकार का इसको काट कर टुकड़ा लेना चाहिए. यंत्र के प्रयोग जिनमे यंत्रो को धारण करने का निर्देश होता हैं उन्हें सामन्यतः भोज पत्र में ही बना कर फिर बाज़ार में मिल रहे विभिन्न ताबीजो के अनुसार से उनके अंदर भर कर प्रयोग करना चाहिए .ताबीज की धातु भी यदि निर्देशित हो तो उसका पालन करे या फिर जो भी धातु या त्रि धातु का आपको ठीक लगे उसका उपयोग करे .. जितना अच्छा और उच्च कोटि का भोज पत्र होगा उतना ही अच्छा हैंहाँ यदि निर्देशित हो तो आप इन यंत्रो को अच्छे से मधवा भी सकते हैं .इन यंत्रो के निर्माण के लिए महा पर्व ही नहीं बल्कि कोई भी शुभ समय लिया जा सकता हैं और इस बात की जानकारी तो आप सदगुरुदेव द्वारा रचित “काल निर्णय “ नाम के ग्रथ से जान सकतेहैं फिर भी यह भी नहीं हो पा रहा हो हर दिन दिन के १२ बजे एक महूर्त होता हैं जिसे अभिजीत महूर्त कहते हैं उस समय भी उपयोग कर सकते हैं , हलाकि जैसा निर्देशित किया गया हो उस यंत्र के निर्माण प्रक्रिया के बारे में वैसा किया भी जाना चहिये . और जब यन्त्र का निर्माण हो जाये तो अब उसकी पूजन कैसे करना हैं यह भी एक आवश्यक बात हैं क्योंकि जा की रही भावना जैसी ..

कोई टिप्पणी नहीं:

Shri Ram Jyotish Sadan – Best Astrologer in Muzaffarnagar | Pandit Ashu Bahuguna

        Shri Ram Jyotish Sadan – Astrologer in Muzaffarnagar श्री राम ज्योतिष सदन, मुजफ्फरनगर में Pandit Ashu Bahuguna द्वारा वैदिक ज्योतिष...