शनिवार, 17 अगस्त 2019

श्री बटुक भैरव अपराध क्षमा पन स्तोत्र


श्री बटुक भैरव अपराध क्षमा पन स्तोत्र
ॐ गुरोः सेवा व्याकत्वा गुरुबचन शकतोपि न भवे
भवत्पुजा – ध्यानाज्ज्प हवन –यागा दिरहित : !
त्व्दर्चा- निर्माणे क्वचिदपि न यत्नं च कृतवान ,
जग ज्जाल-ग्रस्तों झटितिकुरु हादर मायि विभो !! 1 !!
प्रभु दुर्गा सुनो ! तव शरणतां सोयधिगतवान ,
कृपालों ! दुखार्त: कमपि भवदन्नयं प्रकथये !
सुहृत ! सम्पतेयहं सरल –विरल साधक जन ,
स्तवदन्य: क्स्त्राता भव-दहन –दाहं शमयति !!2!!
वदान्यों मन्यसत्वं विविध जनपालों वभसि वै ,
दयालुर्दी नर्तान भवजलधिपारम गमयसि !
अतस्त्वतो याचे नति- नियमतोयकिञ्च्नधन ,
सदा भूयात भावः पदनलिनयोस्ते तिमिरहा !!3!!
अजापूर्वो विप्रो मिलपदपरो योयतिपतितो ,
महामूर्खों दुष्टो वृजननिरत: पामरनृप: !
असत्पाना सक्त्तो यवन युवती व्रातरमण,
प्रभा वातत्वन्नान्म: परमपदवी सोप्याधिगत !!4!!
द्यां दीर्घाम दीने बटुक ! कुरु विश्वम्भर मयी,
न चन्यस्संत्राता परम शिव मां पलाया विभो !
महाशचर्याम प्राप्तस्त्व सरलदृष्टच्या विरहित: ,
कृपापूर्णेनेत्रे: कजदल निर्भेमा खचयतात !!5!!
सहस्ये किं हंसो नहि तपति दीनं जनचयम,
घनान्ते किं चंर्दोंयसमकर- निपातो भुवितले!
कृपादृष्टे स्तेहं भयहर भिवों किं विरहितों,
जले वा हमर्ये वा घनरस- निपातो न विषम!!6!!
त्रिमूर्तित्वं गीतों हरिहर- विधात्मकगुणो !
निराकारा: शुद्ध: परतरपर: सोयप्यविषय: ,
द्या रूपं शान्तम मुनिगननुतं भक्तदायितं !!7!!
तपोयोगं संख्यम यम-नियम –चेत: प्रयजनं,
न कौलाचर्चा-चक्रम हरिहरविधिनां प्रियतरम!
न जाने ते भक्तिम परममुनिमार्गाम मधु विधि,
तथाप्येषा वाणी परिरटति नित्यं तव यश :!!8!!
न मे कांक्षा धर्मे न वसुनिच्ये राज्य निवहे: ,
न मे स्त्रीणा भोगे सखि-सुत-कटुम्बेषु न च मे!
यदा यद्द्द भाव्यं भवतु भगवन पूर्वसकृतान ,
ममैत्तू प्रथर्यम तव विमल- भक्ति: प्रभवतात!!9!!
कियांस्तेस्मदभार: पतित पतिता स्तारयासि भो,
मद्न्य: क: पापी ययन बिमुख पाठ रहित :!
दृढ़ो मे विश्वासस्तव नियति रुद्धार विषय:,
सदा स्याद विश्र्म्भ: कवचिदपि मृषा माँ च भवतात!!10!!
भवदभावादभिन्नो व्यसन- निरत: को मदपरो ,
मदान्ध: पाप आत्मा बटुक !शिव ! ते नाम रहित !
उदरात्मन बन्धो नहि तवकतुल्य: कालुपहा ,
पुनः संचिन्त्यैवं कुरु हृदि यथेच्छसि तथा !!11!!
जपान्ते स्नानांते हमुषसि च निशिथे जपति यो ,
महा सौख्यं देवी वितरति नु तस्मै प्रमुदित:!
अहोरात्रम पाशर्वे परिवसति भकतानु गमनों ,
वयोन्ते संहृष्ट: परिनियति भकतानस्व भुवनम !!12!!
ओं रां रामाय नम:
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श्री राम ज्योतिष सदन
भारतीय वैदिक ज्योतिष एवं मंत्र यंत्र तंत्र परामर्शदाता
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मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश

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