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Sunday, 4 January 2015

मूठ निवारण मंत्र :

यह पूर्व काल से ही आदिवासी जनजातियों द्वारा अपनाये जाने वाला यह निकृष्ट मारण प्रयोग है...हांडी उड़ने की क्रिया भी काफी निकृष्ट होती होती है. हाँ इनमें यदि यह किसी जानकार व्यक्ति के हाथ लग जाये तो वह भेजने वाले को भी इसे वापस भेज कर मार सकता है. जिस व्यक्ति पर हंडिया / मूठ का प्रयोग किया गया है वह व्यक्ति अपने ऊपर मंडराती हुई हांडी देखते ही तत्काल निम्नलिखित प्रयोग करेगा तो बच जायेगा और मूठ वापस भेजने वाले के पास चली जायेगी :-
१. हंडिया देखते ही अपने हाथ की अंगुली को काट कर भूमि पर रक्त छिटका दे तो मूठ वापस चली जायेगी.
२. निम्न जाति का जूठन / मलमूत्र या स्वमूत्र जिह्वाग्र में लगाते हुए एकटक उस हंडिया की ओर आकाश में देखता रहे तो मूठ वापिस चली जायेगी.
३. मूठ निवारण मंत्र :
"ऊँ ह्रीं आई को लगाई को जट जट खट खट
उलट पलट लूका को मूका को नार नार
सिद्ध यति की दोहाई मन्त्र सांचा फुरो वाचा"
विधि :
दीपावली या ग्रहण की रात्री को एक हज़ार जाप कर मन्त्र सिद्ध कर ले. फिर उडद के दानों पर २१ बार मन्त्र पढ़ कर जिधर से मूठ आ रही हो उधर या सभी दिशाओं में और जिस व्यक्ति के मूठ लगी हो उसके ऊपर वो दाने गिरा देन, तो मूठ शांत हो जायेगी.

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