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Sunday, 4 January 2015

श्री वीर भैरो मंत्र



स्व रक्षा और शत्रु नाशन हेतु श्री वीर भैरो मंत्र
यह मंत्र अपने आप मे पूर्ण चैतन्य मंत्र है और इसका प्रभाव भी बड़ा भयंकर है,इस मंत्र कि सिद्धि के लिए मंत्र जाप रोज करना पड़ता है,कम से कम १ माला रोज या फिर ११ माला भी हम हमारी उपयुक्तता से कर सकते है,इस साधना मे किसी माला का उपयोग नहीं है,सिर्फ काला आसन और दक्षिण दिशा महत्वपूर्ण है,समय रात्रि काल मे ९:३६ के बाद,और जैसे जैसे मंत्र जाप बढ़ता है हमे मंत्र के प्रभाव का अनुभव होने लगता है,और एक दिन येसा भी आता है साधना काल मे कि बाबा भैरो प्रत्यक्ष होते है या फिर स्वप्न मे आकर स्वयं ही हमारे रक्षा करने कि जिम्मेदारी का वचन देते है
मंत्र :-
हमें जो सतावै,सुख न पावै सातों जन्म |
इतनी अरज सुन लीजै,वीर भैरो | आज तुम ||
जितने होंय सत्रु मेरे.और जो सताय मुज़े |
वाही को रक्त पान.स्वान को कराओ तुम ||
मार-मार खड्गन से, काट डारो माथ उनके |
मास रक्त से नहावो, वीर भैरो | तुम ||
कालका भवानी ,सिंह-वासिनी को छोड़ |
मैंने करी आस तेरी, अब करो काज इतनो तुम ||

2 comments:

  1. नाभि सही करने का मंत्र बताए

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