गुरुवार, 19 सितंबर 2024

दश महाविद्या प्रयोग

 

 

 


  दश महाविद्या प्रयोग
 १ : प्रथम महाविद्या काली : काली मंत्र किसी भी प्रकार की सफलता के लिए उपयुक्त है इस विद्या के प्रयोग से कोई भी बाधा सामने नहीं आती है |
२ : द्वितीय महाविद्या तारा : तारा [ कंकाल मालिनी ] यह सिद्ध विद्या शत्रुओ के नाश करने के लिए व जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए विशेष लाभदाई है |
३ : तृतीय महाविद्या षोडशी : षोडशी [ श्रीविद्या त्रिपुरा ललिता त्रिपुर सुंदरी ] यह सिद्ध विद्या और मोक्ष दात्री है जीवन में पूर्ण सफलता व आर्थिक दृष्टि से उच्च कोटि की सफलता के लिए इस मंत्र की साधना करे |
४ : चतुर्थ महा विद्या भुवनेश्वरी : भुवनेश्वरी [राजराजेश्वरी ] की साधना से विद्या प्राप्त वशीकरण सम्मोहन आदि कार्यो की सिद्धि के लिए इस महाविद्या का प्रयोग करे इस मंत्र के जप से [करे या कराये] वशीकरण प्रयोग विशेषत: लाभ प्राप्त होता है |
५ : पंचम महाविद्या छिन्नमस्ता : छिन्नमस्ता की साधना से मोक्ष विद्या प्राप्त होती है | विशेषत: शत्रु नाश व् शत्रु पराजय तथा मुक़दमे में विजय के लिए इस महाविद्या का प्रयोग किया जाता है |
६ : षष्टम महाविद्या त्रिपुरभैरवी : त्रिपुरभैरवी [ सिद्ध भैरवी ] की साधना से रोग शांति आर्थिक उन्नति सर्वत्र विजय व्यापर में सर्वोपरि होने के लिए त्रिपुरभैरवी का प्रयोग करे |
७ : सप्तम महाविद्या धूमावती : धूमावती [ लक्ष्मी ] की साधना से पुत्र लाभ धन लाभ और शत्रु पर विजय प्राप्ति के लिए अत्यंत लाभ दायक है |
८ : अष्टम महाविद्या बंगलामुखी : इस अनुष्ठान को सावधानी पूर्वक करना चाहिए,नहीं तो विपरीत प्रभाव पड़ सकता है | इस मन्त्र के प्रभाव से [ जप कराने से ] शत्रुओ पर विजय एवं मुकदमो में विजय प्राप्ति तथा विशेष आर्थिक उन्नति के लाभ है |
९ : नवम महाविद्या मातंगी : मातंगी [ सुमुखी उच्चिस्थ चंडालिक ] इसके अनुष्ठान से जीवन में पूर्णता और विवाह के लिए प्रयोग किया जाता है, मनोकामनापूर्ति के लिए इस मन्त्र का प्रयोग करे |
१० : दशम महाविद्या कमला : कमला [ लक्ष्मी नारायणी ] इस मन्त्र के अनुष्ठान से आर्थिक भौतिक क्षेत्र में उच्चतम स्थिति करने के लिए दरिद्रता दूर करने के लिए व्यापर उन्नति तथा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस मन्त्र का प्रयोग करे |
[ महाविद्या प्रयोग ]
१ : महाविद्या प्रयोग उस समय किया जाता है जब घर में किसी प्रकार की अशांति हो या बाधा [ भूत प्रेत आदि ] उत्पन्न होती हो जिसके करने परिवार में अशांति हो रही हो तो इस प्रयोग के २१ पाठ कराने अथवा १०८ पाठ कराने व् हवन कराने से तत्काल लाभ प्राप्त होता है | यह प्रयोग अनुभव सिद्ध है |
[ प्रत्यंगिरा व् विपरीत प्रत्यंगिरा स्त्रोत्र ]
श्री प्रत्यंगिरा स्त्रोत्र : प्रत्यंगिरा के शास्त्रीय अनुष्ठान मात्र से समस्त शत्रु नष्ट हो जाते है | इसमें साधक को किसी प्रकार की कोई हानी नहीं होता है | इसके कम से कम १०८ पाठ कराने से लाभ शुरु हो जाता है | मुक़दमे में विजय तथा प्रबल शत्रु क्यों न हो ,उसकी पराजय अवश्य होती है
श्री विपरीत प्रत्यंगिरा स्त्रोत्र : विपरीत प्रत्यंगिरा स्त्रोत्र के पाठ करने मात्र से शत्रु का विशेष क्षय यहाँ तक की वह मृत्यु को भी प्राप्त हो जाता है , तथा इस पाठ के साथ - साथ साधक की सुरक्षा भी होती है | इस का कम से कम १०८ पाठ या संभव हो तो ११०० पाठ करवाहोता हैवे तो सफलता अवश्य प्राप्त होता है|

श्रीराम ज्योतिष सदन पंडित आशु बहुगुणा

 मोबाईल नं- और व्हाट्सएप नंबर है।-9760924411

 -https://shriramjyotishsadan.in/

 

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