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बुधवार, 22 सितंबर 2021

सिद्ध लक्ष्मी सहस्त्राक्षरी मंत्र साधना।

सिद्ध लक्ष्मी सहस्त्राक्षरी मंत्र साधना। 
विनियोगः -- ॐ अस्य श्री सर्व महाविद्या महारात्रि गोपनीय मंत्र रहस्याति रहस्यमयी पराशक्ति श्री मदाधा भगवती सिद्ध लक्ष्मी सहस्त्राक्षरी सहस्त्र रूपिणी महाविद्याया: श्री इन्द्र ऋषि गायत्र्यादि नाना छन्दांसि नवकोटि शक्तिरूपा श्री मदाधा भगवती सिद्ध लक्ष्मी देवता श्री मदाधा भगवती सिद्ध लक्ष्मी प्रसादादखिलेष्टार्थे जपे पाठ विनियोगः
ऋष्यादि न्यास
श्री इन्द्र ऋषिभ्यां शिरसे नमः
गायत्र्यादि नानाछन्देभ्यो नम: मुखे
नव कोटि शक्तिरूपा श्री मदाधा भगवती सिद्ध लक्ष्मी प्रसादाद खिलेष्टार्थे जपे पाठे विनियोगाय नमः सर्वांगे
अंग न्यास
ॐ श्रीं सहस्त्रारे (सहस्त्रार चक्र)
ॐ क्लीं नमो नेत्रयुगले (दोनों नेत्र)
ॐ श्रीं नमः हृदये
ॐ ह्रीं नमः जंघा द्वये (जांघ)
ॐ ह्रीं नमः भाले(ललाट)
ॐ ऐं नमो हस्त युगले(दोनों हाथ)
ॐ क्लीं नमः कटौ(पैर)
ॐ श्रीं नमः पादादि सर्वांगे
लक्ष्मी के चित्र के आगे 21 पाठ करे पुष्य योग में।
महाविद्या मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ह्सौ श्रीं ऐं ह्रीं क्लीं सौ: सौ: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं जय जय महालक्ष्मी जगदाधे विजये सुरासुर त्रिभुवन निदाने दयांकुरे सर्व देव तेजो रूपिणी विरंचि संस्थिते विधि वरदे सच्चिदानन्दे विष्णु देहावृते महा मोहिनी नित्य वरदान तत्परे महा सुधाब्धि वासिनि महा तेजो धारिणी सर्वाधारे सर्व कारण कारिणे अचिन्त्य रूपे इन्द्रादि सकल निर्जर सेविते साम गान गायन परिपूर्णोदय कारिणी विजये जयंति अपराजिते सर्व सुन्दरि रक्तांशुके सूर्य कोटि संकाशे चन्द्र कोटि सुशीतले अग्निकोटि दहन शीले यम कोटि वहन शीले  ॐ कार नाद बिन्दु रूपिणी निगमागम भागदायिनी त्रिदश राजदायिनी सर्व स्त्री रत्न स्वरूपिणी दिव्य देहिनी निर्गुणो सगुणे सद् सद् रूपधारिणी सुर वरदे भक्त त्राण तत्परे बहु वरदे सहस्त्राक्षरे अयुताक्षरे सप्त कोटि लक्ष्मी रूपिणी अनेक लक्ष लक्ष स्वरुपे अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड नायिके चतुर्विंशति मुनि जन संस्थिते चतुर्दश भुवन भाव विकारणे गगन वाहिनि नाना मंत्र राज विराजते सकल सुंदरीगण सेविते चरणारविन्दे महात्रिपुर सुन्दरि कामेश दायिते करुणा रस कल्लोलिनि कल्प वृक्षादि स्थिते चिंतामणि द्वय मध्यावस्थिते मणि मन्दिरे निवासिनी विष्णु वक्षस्थल कारिणे अजिते अमिले अनुपम चरिते मुक्ति क्षेत्राधिष्ठायिनी प्रसीद प्रसीद सर्व मनोरथान पूरय पूरय सर्वारिष्ठान छेदय छेदय सर्व ग्रह पीड़ा ज्वराग्र भयं विध्वंसय विध्वंसय सर्व त्रिभुवन जातं वशय वशय मोक्ष मार्गाणि दर्शय दर्शय ज्ञान मार्ग प्रकाशय प्रकाशय अज्ञान तमो नाशय नाशय धन धान्यादि वृद्धिं कुरु कुरु सर्व कल्याणानि कल्पय कल्पय मां रक्ष रक्ष सर्वायद्भयो निस्तारय निस्तारय वज्र शरीर साधय साधय ह्रीं क्लीं सहस्त्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महा विद्यायै नमः ।।
पंडित आशु बहुगुणा
मोबाइल-9760924411

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