Saturday, 8 February 2020

रुके हुए सारे काम अब होंगे पुरे


श्री भैरव मन्त्र
“ॐ नमो भैंरुनाथ, काली का पुत्र! हाजिर होके, तुम मेरा कारज करो तुरत। कमर बिराज मस्तङ्गा लँगोट, घूँघर-माल। हाथ बिराज डमरु खप्पर त्रिशूल। मस्तक बिराज तिलक सिन्दूर। शीश बिराज जटा-जूट, गल बिराज नोद जनेऊ। ॐ नमो भैंरुनाथ, काली का पुत्र ! हाजिर होके तुम मेरा कारज करो तुरत। नित उठ करो आदेश-आदेश।”
विधिः पञ्चोपचार से पूजन। रविवार से शुरु करके २१ दिन तक मृत्तिका की मणियों की माला से नित्य अट्ठाइस (२८) जप करे। भोग में गुड़ व तेल का शीरा तथा उड़द का दही-बड़ा चढ़ाए और पूजा-जप के बाद उसे काले श्वान को खिलाए। यह प्रयोग किसी अटके हुए कार्य में सफलता प्राप्ति हेतु है।

श्रीराम ज्योतिष सदन
पंडित आशु बहुगुणा
मोबाइल नं-8279760289
व्हाट्सएप नंबर-9760924411

र्सव सिद्धि प्रदायक प्रत्यक्ष दुर्गा सिद्धि प्रयोग


र्सव सिद्धि प्रदायक प्रत्यक्ष दुर्गा सिद्धि प्रयोग
यह प्रयोग किसी भी दिन सम्पन्न किया जा सकता है, दुर्गा पूजा के लिए किसी भी प्रकार के मुहूर्त की आवश्यकता नहीँ रहती, देवी रहस्य तन्त्र के अनुसार-दुर्गा पूजा मेँ न तो कोई विशेष विधान है, न विध्न है और न कठिन आचार।
प्रातः र्सूयोदय से र्पुव उठ कर साधक स्नान कर शुद्ध पीले वस्त्र धारण कर अपने पूजा स्थान को स्वच्छ करेँ, जल से धोकर स्थान शुद्धि और भूमि शुद्धि कर अपना आसन बिछाएं, आसन पर बैठ कर ध्यान करेँ , अपने चित को एकाग्र करेँ, कार्य सिद्धि साधना के संबंध मेँ पूरे विश्वाश के आधार पर कार्य करते हुए, संकल्प लेँ ।
अपने सामने सिँह पर स्थित देवी का एक चित्र स्थापित करेँ, और "श्री गणेशाय नमः" बोले फिर एक ओर घी का दीपक तथा दूसरी ओर धूप अगरबत्ती इत्यादि जयाएं ।
अब बाएं हाथ मे जल लेकर दाएं हाथ से अपने मुख, शरीर इत्यादि पर छिडकते हुए निम्न मंत्रों के उच्चारण के साथ तत्व - न्यास सम्पन्न करते हुए, थोडा जल दोनो आखो मे लगा कर भूमि पर छोड देँ ।
ॐ आत्म तत्वाय नमः ।
ॐ ह्रीँ विद्या तत्वाय नमः ।
ॐ दुं शिव तत्वाय नमः ।
ॐ गुं गुरु तत्वाय नमः ।
ॐ ह्रीं शक्ति तत्वाय नमः ।
ॐ श्रीँ शक्ति तत्वाय नमः ।
सामने चौकी पर पीला वस्त्र बिछा कर उस पर पुष्प की पंखुडियोँ का आसन बनाएं, तथा दुर्गा यंत्र को दुग्ध धारा से फिर जल धारा से धो कर , साफ कपडे से पोछ कर--
ॐ ह्रीँ वज्रनख दंष्ट्रायुधाय महासिँहाय फट् ।
इस मंत्र का उच्चारण करते हुए दुर्गा यंत्र को पुष्प के आसन पर स्थापित कर अबीर, गुलाल , कुंकुंम , केशर , मौली , सिंन्दूर अर्पित करेँ , इसके पश्चात् एक पुष्प माला देवी के चित्र पर चढाए तथा दूसरी माला इस इस देवी यंत्र के सामने रख देँ ।
अब दुर्गा की शक्तियो का पूजन कार्य सम्पन्न करेँ, सामने दुर्गा यंत्र के आगे 9 गोमती चक्र स्थापित करेँ, (गोमती चक्र के आभाव मे यंत्र पे ही) प्रत्येक चक्र के नीचे पुष्प की एक एक पंखुडी रखे, तथा चावल को कुंकुंम से रंग कर मंत्र जप करते हुए इन 9 शक्तियो का जप करेँ ।
ॐ प्रभायै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ विशुद्धाय नमः ।
ॐ सुप्रभायै नमः
ॐ मायायै नमः ।
ॐ सूक्ष्मायै नमः ।
ॐ नन्दिन्यै नमः ।
ॐ विजयायै नमः ।
ॐ र्सव सिद्धिदायै नमः ।
अब गणेश पूजन कर देवी का पूजन सम्पन्न करेँ, अपने हाथ मे धूप लेकर 21 बार धूप करेँ , फिर दुर्गा अष्टाक्षर मंत्र का जप प्रारम्भ करेँ ।
प्रत्यक्ष दुर्गा सिद्धि अष्टाक्षर मंत्र--
॥ ॐ ह्रीँ दुं दुर्गायै नमः ॥
शारदा तिलक मे लिखा है कि शान्त ह्रदय से चित्त मे शान्ति तथा एकाग्रता रखते हुए, साधक इस मंत्र की रोज 51 माला का जप 121 दिन उसी स्थान पर बैठ कर करेँ तो उसे साक्षात स्वरुप मेँ प्रगट हो कर माँ अष्ट सिद्धि वरदान देती है. साधक को जो वर प्राप्त होता है, उस से साधक भैरव के समान हो जाता है, उसे अभय का वह स्वरुप प्राप्त हो जाता है कि उसके मन से भय डर पूण रुप से समाप्त हो जाता है. शरीर की व्याधियो का निवारण तथा दीर्धायु प्राप्ति के लिए भी यही र्सवश्रेष्ठ विधान है ।
प्रतिदिन पूजा के पश्चात साधक देवी की आरती तथा ताम्र पात्र मे जल को आचमनी मे ले कर ग्रहण करेँ तो उसके भीतर शक्ति का प्रादुर्भाव होता है ।

श्रीराम ज्योतिष सदन. भारतीय वैदिक ज्योतिष.और मन्त्र  यन्त्र तन्त्र एवं रत्न परामँश दाता ।आपका दैवज्ञ पंडित आशु बहुगुणा ।  अपनी जन्मकुण्डली के अनुकूल विशिष्ट मन्त्र यन्त्र तन्त्र के माध्यम से कायॅ सिद्ध करने के लिये सम्पकॅ करे । --- संपर्क सूत्र---9760924411

शत्रुओं से छुटकारा पाने हेतु एक लघु प्रयोग

शत्रुओं से छुटकारा पाने हेतु एक लघु प्रयोग:- ऐसे ही लोगों से पीछा छुड़ाने का एक प्रयोग दे रहा हूँ। जो स्वयं भी कई बार कर चूका हूँ और दूसरों से भी सफलता पूर्वक करवा चूका हूँ।
एक बार से ही शत्रु शांत हो जाता है और परेशान करना छोड़ देता है पर यदि जल्दी न सुधरे तो पांच बार तक प्रयोग कर सकते हैं।

इसके लिए किसी भी मंगलवार या शनिवार को भैरवजी के मंदिर जाएँ और उनके सामने एक आटे का चौमुखा दीपक जलाएं। दीपक की बत्तियों को रोली से लाल रंग लें। फिर शत्रु या शत्रुओं को याद करते हुए एक चुटकी पीली सरसों दीपक में डाल दें। फिर निम्न श्लोक से उनका ध्यान कर 21बार निम्न मन्त्र का जप करते हुए एक चुटकी काले उड़द के दाने दिए में डाले। फिर एक चुटकी लाल सिंदूर दिए के तेल के ऊपर इस तरह डालें जैसे शत्रु के मुंह पर डाल रहे हों। फिर 5 लौंग ले प्रत्येक पर 21 21 जप करते हुए शत्रुओं का नाम याद कर एक एक कर दिए में ऐसे डालें जैसे तेल में नहीं किसी ठोस चीज़ में गाड़ रहे हों। इसमें लौंग के फूल वाला हिस्सा ऊपर रहेगा।
फिर इनसे छुटकारा दिलाने की प्रार्थना करते हुए प्रणाम कर घर लौट आएं।

ध्यान :-
ध्यायेन्नीलाद्रिकान्तम शशिश्कलधरम
मुण्डमालं महेशम्।
दिग्वस्त्रं पिंगकेशं डमरुमथ सृणिं
खडगपाशाभयानि।।
नागं घण्टाकपालं करसरसिरुहै
र्बिभ्रतं भीमद्रष्टम।
दिव्यकल्पम त्रिनेत्रं मणिमयविलसद
किंकिणी नुपुराढ्यम।।

मन्त्र:-
ॐ ह्रीं भैरवाय वं वं वं ह्रां क्ष्रौं नमः।

यदि भैरव मन्दिर न हो तो शनि मन्दिर में भी ये प्रयोग कर सकते हैं।

दोनों न हों तो पूरी क्रिया घर में दक्षिण मुखी बैठ कर भैरव जी के चित्र के समक्श पूजन कर उनके लें और दीपक मध्य रात्रि में किसी चौराहे पर रख आएं। चौराहे पर भी ये प्रयोग कर सकते हैं। परन्तु याद रहे चौराहे पर करेंगे तो कोई देखे न वरना कोई टोक सकता है जादू टोना करने वाला भी समझ सकता है। चौराहें पर करें तो चुपचाप बिना पीछे देखे घर लौट आएं हाथ मुंह धोकर ही किसी से बात करें।

यदि एक बार में शत्रु पूर्णतः शांत न हो तो 5 बार तक एक एक हफ्ते बाद कर सकते हैं।

उक्त प्रयोग शत्रु के उच्चाटन हेतु भी कर सकते हैं पर उसमे बत्ती मदार के कपास की बनेगी और दीपक शत्रु के मुख्य द्वार के सामने जलाना होगा।

जय श्री राम ------
आपका दैवज्ञश्री पंडित आशु बहुगुणा । पुत्र श्री ज्योतिर्विद पंडित टीकाराम बहुगुणा ।
मोबाईल न0॰है (9760924411) इसी नंबर पर संपर्क करें। मुजफ्फरनगर ॰उ0॰प्र0.•

सर्व मनोकामना पूरक भैरव


सर्व मनोकामना पूरक भैरव देव जी का नित्य जाप करने के लिए शाबर मंत्र जन हितार्थ प्रस्तुत है।

ॐ सत् नमो आदेश गुरु को आदेश
गुरूजी चंडी चंडी तो प्रचंडी
अला-वला फिरे नवखंडी
तीर बांधू तलवार बांधू बीस कोस पर बांधू वीर
चक्र ऊपर चक्र चले भैरव वली के आगे धरे
छल चले वल चले तब जानबा काल भैरव तेरा रूप कौन भैरव
आदि भैरव युगादी भैरव त्रिकाल भैरव कामरु देश रोला मचाबे
हिन्दू का जाया मुसलमान का मुर्दा फाड़ फाड़ बगाया
जिस माता का दूध पिया सो माता कि रक्षा करना
अबधूत खप्पर मैं खाये
मशान मैं लेटे
काल भैरव तेरी पूजा कोण मेटे
रजा मेटे राज-पाठ से जाये
योगी मेटे योग ध्यान से जाये
परजा मेटे दूध पूत से जाये
लेना भैरव लोंग सुपारी
कड़वा प्याला भेंट तुम्हारी
हाथ काती मोंडे मड़ा जहा सुमिरु ताहा हाज़िर खड़ा
श्री नाथ जी गुरूजी आदेश आदेश। ।

किसी भी पुष्य नक्षत्र या गुप्त नवरात्रि से किसी भी शुभ  पर्व आदि को इस मंत्र को जाग्रत कर लें उसके बाद नित्य भैरव जी के सामने इस मंत्र कि दो माला का जाप करे। या यथाशक्ति जाप करे।
श्रीराम ज्योतिष सदन
पंडित आशु बहुगुणा
मोबाइल नं-8279760289
व्हाट्सएप नंबर-9760924411

रोग मुक्ति के अदभूत उपाय


    घर के प्रत्येक सदस्य और अतिथियों की संख्या गिनकर उसमे जोड़कर कुल संख्या के अनुसार मीठी रोटी प्रत्येक माह एक बार कुत्तों या कोओं को खिलाये !
    पका हुआ फोफा कद्दू जो अन्दर से खोखला हो , धर्म स्थल (मंदिर) में तीन या छः माह में एक बार अवश्य रखे !
    रात्रि में रोगी के पास ताम्बे के दो सिक्के रखकर प्रातः किसी भंगी को चालीस तेतालीस दिन तक देते रहे !
    भोजन जहाँ बनाएं वहां ही खाएं तो राहू के कुप्रभाव से बच पायेंगे व मंगल राहु का शुभ प्रभाव मिलेगा !
    रात्रि में थोडा जल किसी बर्तन में रखकर सोयें और अगले दिन ऐसी जगह डाल दें, तुलसा में डाल दें, इसको अपने प्रयोग में नहीं लाना चाहिए !
    एक गोमती चक्र को चांदी में पिरोकर पलंग के सिरहाने बाँधने से रोग घटना शुरू हो जाता है!
    मंगलवार-रविवार को फिटकरी का टुकड़ा बच्चे के सिरहाने रख दें, इससे बच्चे को नजर नहीं लगेगी !
    अष्टधातु का कडा बच्चे को पहना दें, रोग ठीक होता है!
श्री राम ज्योतिष सदन 
भारतीय वैदिक ज्योतिष एवं मंत्र यंत्र तंत्र परामर्शदाता 
दैवज्ञ पंडित आशु बहुगुणा मोबाइल नंबर 97 6092 4411 यही हमारा WhatsApp नंबर भी है।
मुजफ्फरनगर उत्तर

दैनिक जीवन मे काम आने वाले तंत्र उपाय

शत्रु शमन के लिए :
साबुत उड़द की काली दाल के 38 और चावल के 40 दाने
मिलाकर किसी गड्ढे में दबा दें और ऊपर से नीबू निचोड़ दें।
नीबू निचोड़ते समय शत्रु का नाम लेते रहें, उसका शमन
होगा और वह आपके विरुद्ध कोई कदमनहींउठाएगा।
अकारण परेशान करने वाले व्यक्ति से शीघ्र छुटकारा पाने के
लिए :
यदि कोई व्यक्ति बगैर किसी कारण के परेशान कर रहा हो,
तो शौच क्रिया काल में शौचालय में बैठे-बैठे वहीं के पानी से
उस व्यक्ति का नाम लिखें और बाहर निकलने से पूर्व
जहां पानी से नाम लिखा था, उस स्थान पर अप बाएं पैर से
तीन बार ठोकर मारें। ध्यान रहे, यहप्रयोग स्वार्थवश न
करें, अन्यथा हानि हो सकती है।
नजर उतारने के प्राचीन उपाय
1. नमक, राई, राल, लहसुन, प्याज के सूखे छिलके व
सूखी मिर्च अंगारे पर डालकर उस आग को रोगी के ऊपर सात
बार घुमाने से बुरी नजर का दोष मिटता है।
2. शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में जाकर प्रेमपूर्वक
हनुमान जी की आराधना कर उनके कंधे पर से सिंदूर लाकर
नजर लगे हुए व्यक्ति के माथे पर लगाने से बुरी नजर
का प्रभाव कम होता है।
3. खाने के समय भी किसी व्यक्ति को नजर लग जाती है। ऐसे
समय इमली की तीन छोटी डालियों को लेकर आग में जलाकर
नजर लगे व्यक्ति के माथे पर से सात बार घुमाकर पानी में
बुझा देते हैं और उस पानी को रोगी को पिलाने से नजर दोष
दूर होता है।
4. कई बार हम देखते हैं, भोजन में नजर लग जाती है। तब
तैयार भोजन में से थोड़ा-थोड़ा एक पत्ते पर लेकर उस पर
गुलाब छिड़ककर रास्ते में रख दे। फिर बाद में
सभी खाना खाएँ। नजर उतर जाएगी।
5. नजर लगे व्यक्ति को पान में गुलाब की सात
पंखुड़ियाँ रखकर खिलाए। नजर लगा हुआ व्यक्ति इष्ट देव
का नाम लेकर पान खाए। बुरी नजर का प्रभाव दूर
हो जाएगा।
6. लाल मिर्च, अजवाइन और पीली सरसों को मिट्टी के एक
छोटे बर्तन में आग लेकर जलाएँ। ‍िफर उसकी धूप नजर लगे
बच्चे को दें। किसी प्रकार की नजर हो ठीक हो जाएगी।
नज़र बाधा
1. आप अपने नए मकान को बुरी नजर से बचाना चाहते हैं
तो मुख्य द्वार की चौखट पर काले धागे से
पीली कौड़ी बांधकर लटकाने से समस्त ऊपरी बाधाओं से
मुक्ति मिलती है।
2. यदि आपने कोई नया वाहन खरीदा है और आप इस बात से
परेशान हैं कि कुछ न कुछ रोज वाहन में गड़बड़ी हो जाती है।
यदि गड़बड़ी नहीं होती तो दुर्घटना में चोट-चपेट लग
जाती है औरबेकार के खर्च से सारी अर्थ-व्यवस्था चौपट
हो जाती है। अपने वाहन पर काले धागे से पीली कौड़ी बांधने
से आप इस बुरी नजर से बच सकेंगे, करके परेशानी से मुक्त
हो जाएं।
3. यदि आपके घर पर रोज कोई न कोई आपदा आ रही है।
आप इस बात को लेकर परेशान हैं कि कहीं किसी ने कुछ कर
तो नहीं दिया। ऐसे में आपको चाहिए कि एक नारियल
को काले कपड़े मेंसिलकर घर के बाहर लटका दें।
4. मिर्च, राई व नमक को पीड़ित व्यक्ति के सिर से वार कर
आग में जला दें। चंद्रमा जब राहु से पीड़ित होता है तब नजर
लगती है। मिर्च मंगल का, राई शनि का और नमक राहु
का प्रतीक है। इन तीनों को आग (मंगल का प्रतीक) में डालने
से नजर दोष दूर हो जाता है। यदि इन तीनों को जलाने पर
तीखी गंध न आए तो नजर दोष समझना चाहिए। यदि आए
तो अन्य उपाय करने चाहिए।
टोटका तीन-यदि आपके बच्चे को नजर लग गई है और हर
वक्त परेशान व बीमार रहता है तो लाल साबुत मिर्च
को बच्चे के ऊपर से तीन बार वार कर जलती आग में डालने
से नजर उतर जाएगी और मिर्च का धचका भी नहीं लगेगा।
5. यदि कोई व्यक्ति बुरी नजर से परेशान है तो कि शनिवार
के दिन कच्चा दूध उसके ऊपर से सात बार वारकर कुत्ते
को पिला देने से बुरी नजर का प्रभाव दूर हो जाता है।
6. यदि कोई व्यक्ति बुरी नजर से परेशान है तो कि मंगलवार
के दिन हनुमान मंदिर जाकर उनके कन्धे से सिन्दुर लेकर
नजर लगे व्यक्ति के माथे पर यह सोचकर तिलक कर दें
कि यह नजर दोष से मुक्त हो गया है।
दिमाग से चिन्ता हटाने का टोटका
अधिकतर पारिवारिक कारणों से दिमाग बहुत ही उत्तेजना में
आजाता है,परिवार की किसी समस्या से या लेन देन
से,अथवा किसी रिस्तेनाते को लेकर दिमाग एक दम उद्वेलित
होने लगता है,ऐसा लगने लगता है कि दिमाग फ़ट
पडेगा,इसका एक अनुभूत टोटका है कि जैसे ही टेंसन हो एक
लोटे में या जग में पानी लेकर उसके अन्दर चार लालमिर्च के
बीज डालकर अपने ऊपर सात बार उबारा (उसारा) करने के
बाद घर के बाहर सडक पर फ़ेंक दीजिये,फ़ौरन आराम मिल
जायेगा।
.
7. यदि आपके बच्चे को बार-बार नजर लग जाती है
तो आपको चाहिए कि आप उसके गले में रीठे का एक फल काले
धागे में उसके गले में पहना दें।
8. यदि आप नजर दोष से मुक्त होना चाहते हैं तो सूती कोरे
कपड़े को सात बार वारकर सीधी टांग के नीचे से निकालकर
आग में झोंक दें। यदि नजर होगी तो कपड़ा जल जाएगा व
जलने की बदबू भी नहीं आएगी। यह प्रयोग बुधवार एवं
शनिवार को ही कर सकते हैं।
9. टोटका नौ-यदि कोई बच्चा नजर दोष से बीमार रहता है
और उसका समस्त विकास रुक गया है तो फिटकरी एवं
सरसों को बच्चे पर से सात बार वारकर चूल्हे पर झोंक देने से
नजर उतर जाती है। यदि यह सुबह, दोपहर एवं सायं
तीनों समय करें तो एक ही दिन में नजर दोष दूर हो जाता है।
घर से पराशक्तियों को हटाने का टोटका
एक कांच के गिलास में पानी में नमक मिलाकर घर के नैऋत्य
के कोने में रख दीजिये,और उस बल्ब के पीछे लाल रंग का एक
बल्व लगा दीजिये,जब भी पानी सूख जाये तो उस गिलास
को फ़िर से साफ़ करने के बाद नमक मिलाकर पानी भर
दीजिये।
बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए :
1-एक काला रेशमी डोरा लें ! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय
नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात
गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें !
2- प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11
बार वार कर किसी कुत्ते को शाम के समय पिला दें !
बच्चा दीर्घायु होगा !
3- यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन
एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम
हो जायगा !
4- सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर
सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास
में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति पूर्वक प्रणाम कर
वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार
की बाधाओं का निवारण होता है।
ससुराल में सुखी रहने के लिए :
1- कन्या अपने हाथ से हल्दी की 7 साबुत गांठें, पीतल
का एक टुकड़ा और थोड़ा-सा गुड़ ससुराल की तरफ फेंके,
ससुराल में सुरक्षित और सुखी रहेगी।
2- सवा पाव मेहंदी के तीन पैकेट (लगभग सौ ग्राम
प्रति पैकेट) बनाएं और तीनों पैकेट लेकर काली मंदिर
या शस्त्र धारण किए हुए किसी देवी की मूर्ति वाले मंदिर में
जाएं। वहां दक्षिणा, पत्र, पुष्प, फल, मिठाई, सिंदूर
तथा वस्त्र के साथ मेहंदी के उक्त तीनों पैकेट चढ़ा दें। फिर
भगवती से कष्ट निवारण की प्रार्थना करें और एक फल
तथा मेहंदी के दो पैकेट वापस लेकर कुछ धन के साथ
किसी भिखारिन या अपने घर के आसपास सफाई करने
वाली को दें। फिर उससे मेहंदी का एक पैकेट वापस ले लें और
उसे घोलकर पीड़ित महिला के हाथों एवं पैरों में लगा दें।
पीड़िता की पीड़ा मेहंदी के रंग उतरने के साथ-साथ धीरे-धीरे
समाप्त हो जाएगी।
पति-पत्नी के बीच वैमनस्यता को दूर करने हेतु :
1. रात को सोते समय पत्नी पति के तकिये में सिंदूर की एक
पुड़िया और पति पत्नी के तकिये में कपूर की २ टिकियां रख
दें। प्रातः होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें
तथा कपूर को निकाल कर उस कमरे जला दें।
पति को वश में करने के लिए :
2- शनिवार की रात्रि में ७ लौंग लेकर उस पर २१ बार
जिस व्यक्ति को वश में करना हो उसका नाम लेकर फूंक मारें
और अगले रविवार को इनको आग में जला दें। यह प्रयोग
लगातार ७ बार करने से अभीष्ट व्यक्ति का वशीकरण
होता है।
3- अगर आपके पति किसी अन्य स्त्री पर आसक्त हैं और
आप से लड़ाई-झगड़ा इत्यादि करते हैं। तो यह प्रयोग आपके
लिए बहुत कारगर है, प्रत्येक रविवार को अपने घर
तथा शयनकक्ष में गूगल की धूनी दें। धूनी करने से पहले उस
स्त्री का नाम लें और यह कामना करें कि आपके पति उसके
चक्कर से शीघ्र ही छूट जाएं। श्रद्धा-विश्वास के साथ करने
से निश्चिय ही आपको लाभ मिलेगा।
घर की कलह को समाप्त करने का उपाय
रोजाना सुबह जागकर अपने स्वर को देखना चाहिये,नाक के
बायें स्वर से जागने पर फ़ौरन बिस्तर छोड कर अपने काम में
लग जाना चाहिये,अगर नाक से दाहिना स्वर चल रहा है
तो दाहिनी तरफ़ बगल के नीचे तकिया लगाकर दुबारा से
सो जाना चाहिये,कुछ समय में बायां स्वर चलने
लगेगा,सही तरीके से चलने पर बिस्तर छोड देना चाहिये।
परिवार में शांति बनाए रखने के लिए :
बुधवार को मिट्टी के बने एक शेर को उसके गले में लाल
चुन्नी बांधकर और लाल टीका लगाकर माता के मंदिर में रखें
और माता को अपने परिवार की सभी समस्याएं बताकर उनसे
शांति बनाए रखने की विनती करें। यह क्रिया निष्ठापूर्वक
करें, परिवार में शांति कायम होगी।
सफलता प्रा प्ति के लिए :
1. किसी कार्य की सिद्धि के लिए जाते समय घर से निकलने
से पूर्व ही अपने हाथ में रोटी ले लें। मार्ग में जहां भी कौए
दिखलाई दें, वहां उस रोटी के टुकड़े कर के डाल दें और आगे
बढ़ जाएं। इससे सफलता प्राप्त होती है।
2॰ किसी भी आवश्यक कार्य के लिए घर से निकलते समय
घर की देहली के बाहर, पूर्व दिशा की ओर, एक
मुट्ठी घुघंची को रख कर अपना कार्य बोलते हुए, उस पर
बलपूर्वक पैर रख कर, कार्य हेतु निकल जाएं, तो अवश्य
ही कार्य में सफलता मिलती है।
3॰ अगर किसी काम से जाना हो, तो एक नींबू लें। उसपर 4
लौंग गाड़ दें तथा इस मंत्र का जाप करें : `ॐ श्री हनुमते
नम:´। 21 बार जाप करने के बाद उसको साथ ले कर जाएं।
काम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
4 चुटकी भर हींग अपने ऊपर से वार कर उत्तर दिशा में फेंक
दें। प्रात:काल तीन हरी इलायची को दाएँ हाथ में रखकर
“श्रीं श्रीं´´ बोलें, उसे खा लें, फिर बाहर जाए¡
प्रातः सोकर उठने के बाद नियमित रूप से
अपनी हथेलियों को ध्यानपूर्वक देखें और तीन बार चूमें। 
ऐसा करने से हर कार्य में सफलता मिलती है। यह
क्रिया शनिवार से शुरू करें।

श्रीराम ज्योतिष सदन
पंडित आशु बहुगुणा
मोबाइल नं-8279760289
व्हाट्सएप नंबर-9760924411

शाबर धूमावती साधना


शाबर धूमावती साधना 
दस महाविद्याओं में माँ धूमावती का स्थान सातवां है और माँ के इस स्वरुप को बहुत ही उग्र माना जाता है ! माँ का यह स्वरुप अलक्ष्मी स्वरूपा कहलाता है किन्तु माँ अलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी है ! एक मान्यता के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया तो उस यज्ञ में शिव जी को आमंत्रित नहीं किया ! माँ सती ने इसे शिव जी का अपमान समझा और अपने शरीर को अग्नि में जला कर स्वाहा कर लिया और उस अग्नि से जो धुआं उठा )उसने माँ धूमावती का रूप ले लिया ! इसी प्रकार माँ धूमावती की उत्पत्ति की अनेकों कथाएँ प्रचलित है जिनमे से कुछ पौराणिक है और कुछ लोक मान्यताओं पर आधारित है !
नाथ सम्प्रदाय के प्रसिद्ध योगी सिद्ध चर्पटनाथ जी माँ धूमावती के उपासक थे ! उन्होंने माँ धूमावती पर अनेकों ग्रन्थ रचे और अनेकों शाबर मन्त्रों की रचना भी की !
यहाँ मैं माँ धूमावती का एक प्रचलित शाबर मंत्र दे रहा हूँ जो बहुत ही शीघ्र प्रभाव देता है !
कोर्ट कचहरी आदि के पचड़े में फस जाने पर अथवा शत्रुओं से परेशान होने पर इस मंत्र का प्रयोग करे !
माँ धूमावती की उपासना से व्यक्ति अजय हो जाता है और उसके शत्रु उसे मूक होकर देखते रह जाते है !
|| मंत्र ||
ॐ पाताल निरंजन निराकार
आकाश मंडल धुन्धुकार
आकाश दिशा से कौन आई
कौन रथ कौन असवार
थरै धरत्री थरै आकाश
विधवा रूप लम्बे हाथ
लम्बी नाक कुटिल नेत्र दुष्टा स्वभाव
डमरू बाजे भद्रकाली
क्लेश कलह कालरात्रि
डंका डंकिनी काल किट किटा हास्य करी
जीव रक्षन्ते जीव भक्षन्ते
जाया जीया आकाश तेरा होये
धुमावंतीपुरी में वास
ना होती देवी ना देव
तहाँ ना होती पूजा ना पाती
तहाँ ना होती जात न जाती
तब आये श्री शम्भु यती गुरु गोरक्षनाथ
आप भई अतीत
ॐ धूं: धूं: धूमावती फट स्वाहा !
|| विधि ||
41 दिन तक इस मंत्र की रोज रात को एक माला जाप करे ! तेल का दीपक जलाये और माँ को हलवा अर्पित करे ! इस मंत्र को भूल कर भी घर में ना जपे, जप केवल घर से बाहर करे ! मंत्र सिद्ध हो जायेगा !
|| प्रयोग विधि १ ||
जब कोई शत्रु परेशान करे तो इस मंत्र का उजाड़ स्थान में 11 दिन इसी विधि से जप करे और प्रतिदिन जप के अंत में माता से प्रार्थना करे –
“ हे माँ ! मेरे (अमुक) शत्रु के घर में निवास करो ! “
ऐसा करने से शत्रु के घर में बात बात पर कलह होना शुरू हो जाएगी और वह शत्रु उस कलह से परेशान होकर घर छोड़कर बहुत दुर चला जायेगा !
|| प्रयोग विधि २ ||
शमशान में उगे हुए किसी आक के पेड़ के साबुत हरे पत्ते पर उसी आक के दूध से शत्रु का नाम लिखे और किसी दुसरे शमशान में बबूल का पेड़ ढूंढे और उसका एक कांटा तोड़ लायें ! फिर इस मंत्र को 108 बार बोल कर शत्रु के नाम पर चुभो दे !
ऐसा 5 दिन तक करे , आपका शत्रु तेज ज्वर से पीड़ित हो जायेगा और दो महीने तक इसी प्रकार दुखी रहेगा !
नोट – इस मंत्र के और भी घातक प्रयोग है जिनसे शत्रु के परिवार का नाश तक हो जाये ! किसी भी प्रकार के दुरूपयोग के डर से मैं यहाँ नहीं लिखना चाहता ! इस मंत्र का दुरूपयोग करने वाला स्वयं ही पाप का भागी होगा !कोई भी जप-अनुष्ठान करने से पूर्व मंत्र की शुद्धि जांचा लें ,विधि की जानकारी प्राप्त कर लें तभी प्रयास करें |गुरु की अनुमति बिना और सुरक्षा कवच बिना तो कदापि कोई साधना न करें |उग्र महाशक्तियां गलतियों को क्षमा नहीं करती कितना भी आप सोचें की यह तो माँ है |उलट परिणाम तुरत प्राप्त हो सकते हैं |अतः बिना सोचे समझे कोई कार्य न करें |पोस्ट का उद्देश्य मात्र जानकारी उपलब्ध करना है ,अनुष्ठान या प्रयोग करना नहीं |अतः कोई समस्या होने पर हम जिम्मेदार नहीं होंगे |.................................
श्री राम ज्योतिष सदन 
भारतीय वैदिक ज्योतिष एवं मंत्र यंत्र तंत्र परामर्शदाता 
दैवज्ञ पंडित आशु बहुगुणा मोबाइल नंबर 97 6092 4411 यही हमारा WhatsApp नंबर भी है।
मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश